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₹5,000 Notes Rule: बैंक में हड़कंप ₹5,000 का नया नोट

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₹5,000 Notes Rule

₹5,000 Notes Rule: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाली खबर ने सबको हैरान कर दिया। संदेशों और तस्वीरों के जरिए दावा किया गया कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ₹5,000 Notes Rule जारी कर दिया है और बैंकिंग सिस्टम को इसके मुताबिक अपडेट भी कर दिया गया है। कई जगहों पर इस नए नोट की तस्वीरें तक शेयर की गईं, जिनमें आधुनिक डिज़ाइन और सुरक्षा फीचर्स दिखाए गए। इतना ही नहीं, लोग यह मानकर बैंक शाखाओं तक पहुँच गए कि अब एटीएम से भी यह नोट मिलने लगेगा। छोटे व्यापारियों में भी अफरा-तफरी फैल गई और चर्चा का दौर शुरू हो गया। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वाकई में ऐसा कोई नोट जारी हुआ है या यह सिर्फ एक और अफवाह है?

कोई आधिकारिक घोषणा नहीं, फैली सिर्फ अफवाह

जब इस दावे की गहराई से जांच की गई, तो साफ हो गया कि न तो भारतीय रिज़र्व बैंक और न ही वित्त मंत्रालय ने ₹5,000 के किसी नए नोट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा की है। न RBI की वेबसाइट पर कोई प्रेस रिलीज़ जारी हुई और न ही किसी सरकारी स्रोत ने इसकी पुष्टि की। यहां तक कि PIB (Press Information Bureau) और RBI के फैक्ट-चेक सेल ने भी इसे झूठा बताया और लोगों से इस तरह की अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील की। असल में, कई बार फोटोशॉप या एआई की मदद से नकली तस्वीरें बनाई जाती हैं, जो असली जैसी दिखती हैं और लोग उन्हें सच मान बैठते हैं।

पहले भी आई थीं ऐसे झूठी खबरें

यह पहली बार नहीं है जब करेंसी नोट को लेकर अफवाहें उड़ाई गई हों। 2016 की नोटबंदी के बाद से ही समय-समय पर ऐसी अफवाहें आती रही हैं। कभी ₹1,000 का नया नीला नोट आने की चर्चा होती है, तो कभी ₹10,000 के डिजिटल सिक्योरिटी वाले नोट की। हर बार इन अफवाहों ने लोगों को भ्रमित किया है और अफरा-तफरी मचाई है। लेकिन हकीकत यह है कि अब तक RBI ने इनमें से किसी भी दावे को सच साबित नहीं किया।

नया नोट छापने की असली प्रक्रिया

अगर वास्तव में कोई नया नोट जारी होता है, तो इसके लिए महीनों की तैयारी करनी पड़ती है। सरकार और RBI मिलकर तय करते हैं कि किस मूल्यवर्ग का नोट लाना है। इसके बाद डिज़ाइन, साइज, रंग और सुरक्षा फीचर्स पर काम किया जाता है। करेंसी प्रेसों में छपाई शुरू होती है और आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस या प्रेस रिलीज़ के जरिए इसकी जानकारी जनता तक पहुँचाई जाती है। इसलिए अचानक किसी वायरल पोस्ट के जरिए नए नोट की खबर सच नहीं हो सकती।

अफवाहों का असर और जनता की चिंता

इन झूठी खबरों का असर केवल सोशल मीडिया पर नहीं रहता, बल्कि आम लोगों के व्यवहार पर भी पड़ता है। लोग डरने लगते हैं कि अगर नया ₹5,000 का नोट आ गया तो पुरानी करेंसी का क्या होगा? दुकानदार इतने बड़े नोट लेंगे या नहीं? क्या इससे कालाबाज़ारी और महंगाई बढ़ जाएगी? कुछ लोग तो घबराकर बैंकों में अपने नोट बदलवाने भी पहुँच जाते हैं, जिससे सिस्टम पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। यही कारण है कि ऐसी खबरें आर्थिक अव्यवस्था तक पैदा कर देती हैं।

सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका

वायरल अफवाहों को फैलाने में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा हाथ है। वॉट्सऐप, फेसबुक, टेलीग्राम और यूट्यूब पर कोई भी व्यक्ति मनगढ़ंत मैसेज या फोटो बना सकता है। अक्सर ये पोस्ट इतने पेशेवर तरीके से तैयार किए जाते हैं कि देखने में बिल्कुल असली लगते हैं। यही वजह है कि आम नागरिक इन्हें सच मानकर दूसरों तक पहुंचा देता है और अफवाह तेजी से फैल जाती है।

सरकार का साफ संदेश

RBI और सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि फिलहाल ₹2000 से ऊपर का कोई भी नया नोट जारी करने की कोई योजना नहीं है। ₹2000 के नोट को भी धीरे-धीरे प्रचलन से बाहर किया जा रहा है। सरकार का फोकस डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने पर है, ऐसे में ₹5000 का नया नोट लाना मौजूदा नीति के बिल्कुल खिलाफ होगा। अगर कभी भविष्य में ऐसा कोई बड़ा निर्णय लिया भी जाता है, तो इसकी जानकारी सबसे पहले आधिकारिक माध्यमों से ही दी जाएगी।

निष्कर्ष

इस पूरी खबर का सार यही है कि ₹5,000 का नया नोट जारी होने की बात पूरी तरह झूठ और अफवाह है। न तो RBI ने ऐसा कोई नोट छापा है और न ही सरकार की ऐसी कोई योजना है। ऐसी झूठी सूचनाओं पर विश्वास करने से बचें और हमेशा आधिकारिक वेबसाइटों या प्रेस रिलीज़ पर भरोसा करें। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमें चाहिए कि बिना पुष्टि किए किसी भी वायरल खबर को आगे न बढ़ा

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